
बैलगाड़ी के नीचे से झांकते हुए जब एक छोटे से बच्चे ने सरकारी स्कूल में पढ़ते बच्चों को देखा, तो उसके मन में एक ही सवाल उठा — “क्या मैं भी कभी स्कूल जा पाऊंगा?” उस दिन उस मासूम की आंखों में जो सपना जागा था, वही आगे चलकर दीपक गाडोलिया के पिता प्रेमकुमार गाडोलिया की प्रेरणा बना। और आज, उसी सपने ने आकार लिया है — बेटा दीपक अब राजस्थान प्रशासनिक सेवा (R.A.S.) का अफसर बन चुका है।
यह सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि यह संघर्ष, विश्वास और शिक्षा की ताकत की मिसाल है।
एक बैलगाड़ी में जन्मी उम्मीद
प्रेमकुमार गाडोलिया का बचपन किसी हवेली में नहीं, बल्कि एक बैलगाड़ी में बीता। पिता गांव-गांव जाकर लोहार का काम करते थे, इसलिए एक जगह ठहराव नहीं था।
हर बार जब गांव के बच्चे स्कूल की ओर जाते, प्रेमकुमार उन बच्चों को बैलगाड़ी के नीचे से देखता और सोचता, “काश मैं भी स्कूल जा पाता।”
लेकिन गरीबी और परिस्थितियों ने रोक लगा दी —
“बेटा, जब ठिकाना ही नहीं, तो पढ़ाई कैसे होगी?”
फिर भी किस्मत ने करवट ली जब सरकारी स्कूल के शिक्षक कन्हैयालाल पाराशर ने उस बच्चे की लालसा देखी और उसे अपने स्कूल में भर्ती कर लिया।
14 जुलाई का दिन — जब बैलगाड़ी में रहने वाला वो बच्चा पहली बार किताबों की दुनिया में दाखिल हुआ।
संघर्षों की आग में तपता बचपन
पांचवीं में ही पिता का देहांत हो गया। पांच भाई और पांच बहनों के बड़े परिवार की जिम्मेदारी आ गई। कभी सुबह का खाना होता तो शाम का नहीं।
पढ़ाई जारी रखना असंभव लगने लगा।
भाइयों ने कहा — “पढ़ाई छोड़, काम कर, यही हमारी रोजी-रोटी है।”
लेकिन उस बच्चे ने ठान लिया — “मैं पढ़ूंगा।”
भाइयों ने उसकी किताबें जला दीं।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
गुरु सत्यनारायण दाधीच आगे आए —
“यह बच्चा मुझे दे दीजिए, मैं इसकी शिक्षा का भार उठाऊंगा।”
और वहीं से प्रेमकुमार का जीवन बदल गया।
जब सपना बेटे में जी उठा
समय बीता, प्रेमकुमार ने अपनी पढ़ाई पूरी की और बाद में एक स्कूल की स्थापना की — “पथिक पब्लिक सेकेंडरी स्कूल”।
सिर्फ 53 बच्चों से शुरू हुआ यह स्कूल आज सैकड़ों बच्चों के भविष्य को रोशन कर रहा है।
लेकिन एक सपना अब भी अधूरा था — “मैं इंजीनियर नहीं बन सका, पर मेरा बेटा जरूर कुछ बड़ा बनेगा।”
दीपक का सफर — प्रिंस कॉलेज से अफसर तक
दीपक गाडोलिया ने 2016 में 91.83% अंकों से स्कूल टॉप किया। IIT की तैयारी की, पर बाद में तय किया — “मैं पिता का सपना पूरा करूंगा, मैं अफसर बनूंगा।”
2019 में दीपक ने Prince College, Sikar में प्रवेश लिया।
वहां का अनुशासन, पढ़ाई का माहौल और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बने सिविल सर्विस इंटीग्रेटेड कोर्स ने दीपक की दिशा तय कर दी।
वह बताते हैं —
“Prince College में न केवल ग्रेजुएशन की पढ़ाई बल्कि सिविल सर्विस की तैयारी भी साथ-साथ होती थी।
अनुशासन, नियमित टेस्ट, डाउट काउंटर और शिक्षकों का मार्गदर्शन — यही मेरी सफलता की असली नींव बने।”
2023 के पहले प्रयास में ही दीपक ने प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों चरण पार किए और 381वीं रैंक के साथ राजस्थान प्रशासनिक सेवा (R.A.S.) में चयनित हुए।
दीपक का संदेश युवाओं के लिए
“शुरुआत में पहाड़ बहुत बड़ा लगता है, लेकिन जब आप एक-एक सीढ़ी चढ़ते जाते हैं, तो वो पास आने लगता है।
अगर आप अपने लक्ष्य के लिए पूरी निष्ठा से प्रयास करते हैं, तो पहली कोशिश में भी सफलता मिल सकती है।”
दीपक बताते हैं कि Prince College का अनुशासन और प्रोत्साहन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।
उनका मानना है कि “सफलता वही पाता है, जो कठिनाई में भी अपने सपनों से मुंह नहीं मोड़ता।”
गौरव की बात
Prince College, Sikar को गर्व है कि दीपक गाडोलिया जैसे विद्यार्थी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और लगन से यह सिद्ध किया कि कोई भी परिस्थिति शिक्षा के आगे बड़ी नहीं होती।
बैलगाड़ी से शुरू हुआ यह सफर अब राजस्थान प्रशासनिक सेवा तक पहुंच गया — यह केवल दीपक की नहीं, हर उस सपने की कहानी है जो मुश्किल हालातों में भी जलते रहते हैं।